जनोक्ति

Sunday, 22 January 2012

JANOKTI : जनोक्ति

JANOKTI : जनोक्ति


‘बेटियाँ मौसम सुहाना/ बेटियाँ मीठा तराना’

Posted: 22 Jan 2012 02:07 AM PST


भोपाल उत्सव मेला में कवि-फि़ल्मकार अनिल गोयलकी प्रदर्षनी 'बिटिया की चिठिया'

कवि-फिल्मकार अनिल गोयल के अनूठे रचनात्मक प्रयोग 'बिटिया की चिठिया' शीर्षक बहुचर्चित कविता पोस्टर प्रदर्शनी का शुक्रवार , 20 जनवरी से दशहरा मैदान में चल रहे भोपाल उत्सव मेला शुभारंभ हो गया है। दर्शक इसे दोपहर 3 बजे से रात्रि 10 बजे तक देख सकते हैं। इस प्रेरक प्रदर्शनी  में छायाचित्रों/ कविताओं, गज़लों, नवगीतों के माध्यम से बेटी के महत्व को दर्शाया  गया है। बेटियों के विविध रंगों, मनःस्थिति, लालसाओं, उपलब्धियों और संघर्षों को सरल-सहज शब्दों और छायाचित्रों के जरिये व्यक्त किया गया है। मेला कार्यालय के निकट स्थित स्टाल नंबर बी 11 में दर्शकों  को 'बिटिया की चिठिया' और 'माँ' पर केंद्रित भावनात्मक पुस्तक 'उसी चैखट से' के सर्जक कवि-फि़ल्मकार अनिल गोयल से रुबरु होने का अवसर भी मिलेगा ताकि वे कविताओं के मनोभावों को उन्हीं से जान-समझ सकें।

 

कल और आज

Posted: 22 Jan 2012 01:55 AM PST


कल और आज के बीच का

यह पल मेरा है

और यही वह समय है

जिसमें मैं

उस सचाई से परिचित हुई हूँ

कि मैं वो नहीं

जो कुछ करती हूँ

करता कोई और है

मैं वो नहीं जो सुनती हूँ

सुनता कोई और है

मैं वो नहीं जो जीती हूँ

जीता कोई और है

मैं तो खुद को जीवित रखने के लिए

रोज़ मरती हूँ

देवी नागरानी

जीवित कोशिका की संरचना

Posted: 22 Jan 2012 01:55 AM PST


सजीव कोशिका जीवन की इकाई होती है तथा इसका अन्तर्निहित पदार्थ जीवन का भौतिक आधार हुआ करता है। कोशिका एक जटिल तंत्र (system) होती है । जब हम जीवित कोशिका में झाँकना तय करते हैं तो 'सूक्ष्म में विराट के दर्शन' का स्मरण हो आता है, । हम इसे अपने आस-पास के बहुत सारे विम्बों के सहारे समझ सकते हैं, जैसे अर्जुन ने कृष्ण के विराट स्वरूप को समझा होगा ।

विज्ञान के विद्यार्थियों को  प्रखर कल्पनाशील होने की जरूरत होती है,इस कथन की प्रासंगिकता स्पष्ट हो जाएगी जब हम निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें।
पौधे के तने के एक ऐसे खण्ड में, जो 1 मि.मि लम्बा, 1मि.मि.चौड़ा और 1मि.मि. मोटा हो, कोशिकाओं की संख्या अनुमानतः एक अरब होती है । इससे औसत कोशा के विस्तार का अनुमान लगाया जा सकता है । प्रत्येक कोशिका के जटिल एवम् गतिशील सायटोप्लाज़्म में अनेकों माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्गी बॉड़ीज,राइबोजोम्स आदि संरचनाओं के साथ एक नाभिक स्थित होता है। नाभिक में क्रोमोज़ोम्स होते हैं. क्रोमोजोम्स जिन्स के वाहक होते हैं। इन्हें कोशिका के अंग कहा जाता है। हर कोशिका-अंग का अपना अनोखा कार्य है, जिनका नाभिक के द्वारा नियन्त्रण होता है जैसे किसी कारखाने में सम्पन्न होनेवाले कार्यों का नियन्त्रण उसका प्रबन्धकर्ता-मण्डल करता है। ये सब आपस में रचनात्मक एवम् क्रियात्मक सम्प्रेषणीयता कायम किये रहते हैं तथा इनमें पारस्परिक निर्भरशीलता होती है। —- इन सबके अनोखे विन्यास और अवस्थिति तथा परत-दर-परत संगठन वाले न्यूक्लियोप्रोटिन अणु तथा जेल(gel) और सॉल(sol) प्रावस्थाओं में इन सारी संरचनाओं के लययुक्त आवर्ती परिवर्तन से एक कोशिका की पूरी तस्वीर का अनुमान हमें चकित ही कर देता है।—
बिल ब्रायसन ने तस्वीर को इस तरह प्रस्तुत किया है।

" अगर हम एक परमाणु को मटर के दाने के बराबर होने की कल्पना करें तो एक कोशिका करीब आधा मील व्यास के गोले की तरह दिखेगी, जो शहतीर के जटिल ढाँचे — सायटोस्केलिटन(cytoskeleton)— द्वारा सम्भला हुआ होता है । इसके अन्दर लाखों, करोड़ों वस्तुएँ— कुछ बास्केटबॉल की माप की, कुछ दूसरी कारों की माप की — गोलियों की तरह छूटती रहती होंगी । एक भी ऐसी जगह नहीं होगी जहाँ कोई हर दिशा से हर क्षण बिना मुकियाए गए या चोट खाए गए खड़ा रह सके । रसायनों और दूसरे कारकों द्वारा, जो इसपर चोट करते रहते हैं या बेपरवाही से इसको चीरा करते हैं— डी.एन. ए. के हर सूत्र पर, औसतन हर 8.4 सेकण्ड में— एक दिन में 10,000 बार – आक्रमण होता रहता है । हर चोट तत्क्षणात् भर जाया करती है, अन्यथा कोशिका का विनाश अवश्यम्भावी होता।"

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